पंचायत
गà¥à¤°à¤¾à¤®à¤¸à¤à¤¾ हथियर नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤ªà¤‚चायत नियारडीह के दकà¥à¤·à¤¿à¤£ पर बसा है, इस गाॅव के पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨ शà¥à¤°à¥€ इनà¥à¤¦à¥à¤°à¤œà¥€à¤¤ हैं। गाॅव में मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से यादव बिरादरी का वरà¥à¤šà¤¸à¥à¤µ है जो दà¥à¤—à¥à¤§ वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¤¾à¤¯ तथा कृषि से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ हà¥à¤ हैं। गाॅव में à¤à¤• पà¥à¤°à¤¾à¤ˆà¤®à¤°à¥€ सà¥à¤•ूल तथा 2 कानà¥à¤µà¥‡à¤‚ट सà¥à¤•ूल à¤à¤µà¤‚ à¤à¤• इणà¥à¤Ÿà¤°à¤®à¥€à¤¡à¤¿à¤à¤Ÿ कालेज है। गाॅव के लोग कृषि à¤à¤µà¤‚ सबà¥à¤œà¥€ की खेती के साथ-साथ छोटी दà¥à¤•ान जैसे – पान, परचून करके अपनी आजीविका चलाते हैं। गाॅव में बिजली व पानी की सà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾ है। गाॅव में मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से यादव, चमार, कà¥à¤·à¤¤à¥à¤°à¥€à¤¯, जातियां रहती हैं। गाॅव की सà¤à¥€ लड़के व लड़कियां शिकà¥à¤·à¤¾ से जà¥à¤¡à¤¼à¥‡ हà¥à¤ हैं तथा उचà¥à¤š शिकà¥à¤·à¤¾ à¤à¤µà¤‚ तकनीकी शिकà¥à¤·à¤¾ के लिठगाॅव से दूर शहर में जाते हैं। गाॅव में पूरी तरह पà¥à¤°à¥‡à¤® व सौहारà¥à¤¦ कायम है।
इतिहास
हथियर गाॅव में आजादी के बाद सà¥à¤µ0 पं0 गोविनà¥à¤¦ शरण चैबे दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ à¤à¤• सà¥à¤•ूल की सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ की गयी जहाॅ पर आजादी के बाद लोगों को उचà¥à¤š शिकà¥à¤·à¤¾ गà¥à¤°à¤¹à¤£ करने के लिठरेहारी इणà¥à¤Ÿà¤° कालेज पतरहीं,जौनपà¥à¤° तथा आदरà¥à¤¶ राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ इणà¥à¤Ÿà¤° कालेज, चोलापà¥à¤° पैदल 12 किमी0 दकà¥à¤·à¤¿à¤£ तथा 5 किमी0 उतà¥à¤¤à¤° नदी के उस पार जाना पड़ता था, जबकि यह सà¥à¤•ूल खà¥à¤²à¤¨à¥‡ से शिकà¥à¤·à¤¾ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करना आसान हà¥à¤† तथा हथियर सà¥à¤•ूल के नाम से पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ हà¥à¤†à¥¤